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Sunday, February 27, 2011

दोस्ती की राह !!!! --- प्रितु सिंह

दोस्ती की राह नही आसन
या हो धरती या आसमान,


दोस्ती से होती है ब्याक्तित्व की पहचान
या हो इन्सान या फिर भगवान,


दोस्ती में नही होनी चाहिए अभिमान
या हो हिन्दू या फिर मुसलमान,


दोस्ती में होते हैं सब एक सामान
या हो बुढा या फिर नादान,


दोस्ती से बढती है हिम्मत और शान
हो जाती है सारी मुश्किलें आशान,


अरशद मेरे सर अनुराधा मेरी जान
है उनपे ये मेरा जीवन कुर्बान,


दोस्ती ही गीता दोस्ती ही कुरान
कभी ना करो इसका अपमान .....

1 comment:

  1. Sundar rachna ....
    likhte raho....
    meri dheron shubhkaamnaayen tumhare sath hay..

    jiwan me dosti ki mahtta ko aaj kal log bahut kam aankte hay..aise me dosti ko kendr me rakh kar itni sundar kavita rachna sarthak lagi..

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